শ্রী ভার্গব পঞ্চাঙ্গউত্তর আমেরিকা
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শ্রী সাঈং চালীসা

Shri Sai Chalisa

পারম্পরিক · 51 চালিশা সংগ্রহে (রণধীর প্রকাশন, হরিদ্বার) যেমন মুদ্রিত

  • বৃহস্পতিবার
  • 20 মিনিট
  • 102 পদ
  1. পদ 1

    पहले साईं के चरणों में, अपना शीश नमाऊँ मैं। कैसे शिर्डी साईं आए, सारा हाल सुनाऊँ मैं।

    পহলে সাঈং কে চরণোং মেং, অপনা শীশ নমাঊঁ মৈং। কৈসে শির্ডী সাঈং আএ, সারা হাল সুনাঊঁ মৈং।

    প্রথমে আমি সাঁইয়ের চরণে মাথা নত করি; সাঁই কীভাবে শিরডিতে এলেন তার পুরো কথা আমি তোমাদের বলব।

    First I bow my head at the feet of Sai; I will tell you the whole story of how Sai came to Shirdi.

    सबसे पहले मैं साईं के चरणों में अपना शीश नवाता हूँ; फिर साईं के शिर्डी आने का सारा वृत्तान्त सुनाता हूँ।

    D’abord je m’incline aux pieds de Sai ; puis je raconterai toute l’histoire de sa venue à Shirdi.

  2. পদ 2

    कौन हैं माता, पिता कौन हैं, यह न किसी ने भी जाना। कहाँ जनम साईं ने धारा, प्रश्न पहेली सा रहा बना।

    কৌন হৈং মাতা, পিতা কৌন হৈং, যহ ন কিসী নে ভী জানা। কহাঁ জনম সাঈং নে ধারা, প্রশ্ন পহেলী সা রহা বনা।

    তাঁর মা কে ছিলেন, বাবা কে ছিলেন, কেউ কখনো জানল না; সাঁই কোথায় জন্ম নিলেন তা ধাঁধাই রয়ে গেল।

    Who his mother was, who his father was, no one ever knew; where Sai took birth has remained a riddle.

    उनकी माता कौन थीं, पिता कौन थे, यह कोई नहीं जान पाया; साईं ने कहाँ जन्म लिया, यह प्रश्न पहेली ही बना रहा।

    Qui était sa mère, qui était son père, nul ne l’a jamais su ; le lieu de naissance de Sai est resté une énigme.

  3. পদ 3

    कोई कहे अयोध्या के, ये रामचन्द्र भगवान हैं। कोई कहता साईं बाबा, पवन-पुत्र हनुमान हैं।

    কোঈ কহে অয়োধ্যা কে, যে রামচন্দ্র ভগবান হৈং। কোঈ কহতা সাঈং বাবা, পবন-পুত্র হনুমান হৈং।

    কেউ বলে তিনি অযোধ্যার প্রভু রামচন্দ্র; কেউ বলে সাঁই বাবা পবনপুত্র হনুমান।

    Some say he is Lord Ramachandra of Ayodhya; some say Sai Baba is Hanuman, son of the Wind.

    कोई कहता है कि ये अयोध्या के भगवान रामचन्द्र हैं; कोई कहता है कि साईं बाबा पवनपुत्र हनुमान हैं।

    Certains disent qu’il est le Seigneur Ramachandra d’Ayodhya ; d’autres, que Sai Baba est Hanuman, fils du Vent.

  4. পদ 4

    कोई कहता है मंगल मूर्ति, श्री गजानन हैं साईं। कोई कहता गोकुल-मोहन देवकी नन्दन हैं साई।

    কোঈ কহতা হৈ মংগল মূর্তি, শ্রী গজানন হৈং সাঈং। কোঈ কহতা গোকুল-মোহন দেবকী নন্দন হৈং সাঈ।

    কেউ বলে সাঁই মঙ্গলরূপ গজানন; কেউ বলে তিনি গোকুলের আদরের, দেবকীর পুত্র।

    Some say Sai is Gajanana, the auspicious form; some say he is the darling of Gokula, the son of Devaki.

    कोई कहता है कि साईं मंगलमूर्ति श्री गजानन हैं; कोई कहता है कि वे गोकुल के मोहन, देवकीनन्दन हैं।

    Certains disent que Sai est Gajanana, la forme de bon augure ; d’autres, qu’il est le charmeur de Gokula, le fils de Devaki.

  5. পদ 5

    शंकर समझे भक्त कई तो, बाबा को भजते रहते। कोई कहे अवतार दत्त का, पूजा साईं की करते।

    শংকর সমঝে ভক্ত কঈ তো, বাবা কো ভজতে রহতে। কোঈ কহে অবতার দত্ত কা, পূজা সাঈং কী করতে।

    অনেক ভক্ত তাঁকে শঙ্কর মনে করে নিরন্তর বাবার পূজা করে; অন্যরা তাঁকে দত্তের অবতার বলে সাঁইয়ের পূজা করে।

    Many devotees, taking him for Shankara, worship Baba without cease; others call him an avatar of Datta and worship Sai.

    कई भक्त उन्हें शंकर मानकर निरन्तर बाबा का भजन करते हैं; कोई उन्हें दत्तात्रेय का अवतार कहकर साईं की पूजा करता है।

    Bien des fidèles, le tenant pour Shankara, adorent Baba sans relâche ; d’autres le disent avatar de Datta et vénèrent Sai.

  6. পদ 6

    कुछ भी मानो उनको तुम, पर साईं हैं सच्चे भगवान। बड़े दयालु, दीनबन्धु, कितनों को दिया जीवन दान।

    কুছ ভী মানো উনকো তুম, পর সাঈং হৈং সচ্চে ভগবান। বড়ে দয়ালু, দীনবন্ধু, কিতনোং কো দিয়া জীবন দান।

    তাঁকে যেমন খুশি ভাবো, সাঁই সত্য ঈশ্বর; পরম করুণাময়, দীনবন্ধু, তিনি কত জনকে জীবন দিয়েছেন।

    Think of him as you will, Sai is the true God; most compassionate, friend of the lowly, he has given life to so many.

    तुम उन्हें कुछ भी मानो, पर साईं सच्चे भगवान हैं; वे बड़े दयालु और दीनबन्धु हैं, उन्होंने कितनों को जीवन-दान दिया।

    Pensez de lui ce que vous voudrez, Sai est le vrai Dieu ; plein de compassion, ami des humbles, il a rendu la vie à tant d’êtres.

  7. পদ 7

    कई वर्ष पहले की घटना, तुम्हें सुनाऊँगा मैं बात। किसी भाग्यशाली की, शिर्डी में आई थी बारात।

    কঈ বর্ষ পহলে কী ঘটনা, তুম্হেং সুনাঊঁগা মৈং বাত। কিসী ভাগ্যশালী কী, শির্ডী মেং আঈ থী বারাত।

    অনেক বছর আগের এক ঘটনা তোমাদের বলব: এক ভাগ্যবান মানুষের বরযাত্রী শিরডিতে এল।

    I will tell you of something that happened many years ago: the wedding party of a fortunate man came to Shirdi.

    मैं तुम्हें कई वर्ष पहले की एक घटना सुनाता हूँ: किसी भाग्यशाली की बारात शिर्डी में आई थी।

    Je vais vous conter un fait d’il y a bien des années : le cortège nuptial d’un homme fortuné arriva à Shirdi.

  8. পদ 8

    आया साथ उसी के था, बालक एक बहुत सुन्दर। आया, आकर वहीं बस गया, पावन शिर्डी किया नगर।

    আয়া সাথ উসী কে থা, বালক এক বহুত সুন্দর। আয়া, আকর বহীং বস গয়া, পাবন শির্ডী কিয়া নগর।

    তার সঙ্গে এল এক অতি সুন্দর বালক; সে এল, সেখানে থেকে গেল, আর শিরডি নগরকে পবিত্র করল।

    With it came a very beautiful boy; he came, settled there, and made the town of Shirdi holy.

    उसी के साथ एक बहुत सुन्दर बालक आया था; वह आया, वहीं बस गया और उसने शिर्डी नगर को पावन कर दिया।

    Avec lui vint un très bel enfant ; il vint, s’y établit et sanctifia la ville de Shirdi.

  9. পদ 9

    कई दिनों तक रहा भटकता, भिक्षा माँगी उसने दर-दर। और दिखायी ऐसी लीला, जग में जो हो गई अमर।

    কঈ দিনোং তক রহা ভটকতা, ভিক্ষা মাঁগী উসনে দর-দর। ঔর দিখায়ী ঐসী লীলা, জগ মেং জো হো গঈ অমর।

    বহুদিন তিনি দ্বারে দ্বারে ভিক্ষা চেয়ে ঘুরলেন; আর এমন দিব্য লীলা দেখালেন যা জগতে অমর হয়ে রইল।

    For many days he wandered, begging for alms from door to door; and he showed such divine play as became immortal in the world.

    कई दिनों तक वह भटकता रहा और द्वार-द्वार भिक्षा माँगता रहा; और उसने ऐसी लीला दिखाई जो संसार में अमर हो गई।

    Bien des jours il erra, mendiant l’aumône de porte en porte ; et il montra un jeu divin qui devint immortel dans le monde.

  10. পদ 10

    जैसे-जैसे उमर बढ़ी, बढ़ती गई वैसे ही शान। घर-घर होने लगा नगर में, साईं बाबा का गुणगान।

    জৈসে-জৈসে উমর বঢ়ী, বঢ়তী গঈ বৈসে হী শান। ঘর-ঘর হোনে লগা নগর মেং, সাঈং বাবা কা গুণগান।

    তাঁর বয়স যত বাড়ল, তাঁর মহিমাও তত বাড়ল; নগরের প্রতিটি ঘরে সাঁই বাবার গুণগান শুরু হল।

    As his years grew, so grew his glory; in every house of the town the praises of Sai Baba began to be sung.

    जैसे-जैसे उनकी आयु बढ़ी, वैसे-वैसे उनकी महिमा भी बढ़ती गई; नगर के घर-घर में साईं बाबा का गुणगान होने लगा।

    À mesure que ses années croissaient, sa gloire croissait aussi ; dans chaque maison de la ville on se mit à chanter les louanges de Sai Baba.

  11. পদ 11

    दिग दिगन्त में लगा गूँजने, फिर तो साईंजी का नाम। दीन-दुखी की रक्षा करना, यहो रहा बाबा का काम।

    দিগ দিগন্ত মেং লগা গূঁজনে, ফির তো সাঈংজী কা নাম। দীন-দুখী কী রক্ষা করনা, যহো রহা বাবা কা কাম।

    তখন সাঁইয়ের নাম সর্বদিকে ধ্বনিত হতে লাগল; দরিদ্র ও দুঃখীকে রক্ষা করাই রইল বাবার কাজ।

    Then the name of Sai began to resound in every direction; to protect the poor and the suffering remained Baba’s work.

    फिर तो दिशा-दिशा में साईं जी का नाम गूँजने लगा; दीन-दुखियों की रक्षा करना ही बाबा का काम रहा।

    Alors le nom de Sai se mit à retentir dans toutes les directions ; protéger les pauvres et les affligés demeura l’œuvre de Baba.

  12. পদ 12

    बाबा के चरणों में जाकर, जो कहता मैं हूँ निर्धन। दया उसी पर होती उनकी, खुल जाते दुःख के बन्धन।

    বাবা কে চরণোং মেং জাকর, জো কহতা মৈং হূঁ নির্ধন। দয়া উসী পর হোতী উনকী, খুল জাতে দুঃখ কে বন্ধন।

    যে বাবার চরণে গিয়ে বলল, ‘আমি গরিব,’ সে তাঁর দয়া পেল, আর তার দুঃখের বাঁধন খুলে গেল।

    Whoever went to Baba’s feet and said, ‘I am poor,’ received his mercy, and the bonds of his sorrow were undone.

    जो कोई बाबा के चरणों में जाकर कहता कि मैं निर्धन हूँ, उस पर उनकी दया होती और उसके दुःख के बन्धन खुल जाते।

    Quiconque allait aux pieds de Baba en disant : « Je suis pauvre », recevait sa miséricorde, et les liens de sa peine se dénouaient.

  13. পদ 13

    कभी किसी ने माँगी भिक्षा, दो बाबा मुझको सन्तान। एवमस्तु तब कहकर साईं, देते थे उसको वरदान।

    কভী কিসী নে মাঁগী ভিক্ষা, দো বাবা মুঝকো সন্তান। এবমস্তু তব কহকর সাঈং, দেতে থে উসকো বরদান।

    কেউ যদি তাঁর কাছে চাইল, ‘বাবা, আমাকে সন্তান দাও,’ সাঁই বলতেন ‘তথাস্তু’ আর তাকে বর দিতেন।

    If someone begged of him, ‘Baba, grant me a child,’ Sai would say ‘So be it’ and give him the boon.

    यदि कभी किसी ने याचना की कि बाबा, मुझे सन्तान दो, तो साईं ‘एवमस्तु’ कहकर उसे वरदान दे देते थे।

    Si quelqu’un l’implorait : « Baba, donne-moi un enfant », Sai disait « Qu’il en soit ainsi » et lui accordait la grâce.

  14. পদ 14

    स्वयं दुःखी बाबा हो जाते, दीन-दुखी जन का लख हाल। अन्तःकरन श्री साईं का, सागर जैसा रहा विशाल।

    স্বয়ং দুঃখী বাবা হো জাতে, দীন-দুখী জন কা লখ হাল। অন্তঃকরন শ্রী সাঈং কা, সাগর জৈসা রহা বিশাল।

    দরিদ্র ও দুঃখীর দুর্দশা দেখে বাবা নিজে ব্যথিত হতেন; শ্রীসাঁইয়ের হৃদয় ছিল সাগরের মতো বিশাল।

    Seeing the plight of the poor and suffering, Baba himself would grieve; the heart of Shri Sai was as vast as the ocean.

    दीन-दुखी लोगों का हाल देखकर बाबा स्वयं दुःखी हो जाते थे; श्री साईं का अन्तःकरण सागर जैसा विशाल था।

    Voyant la détresse des pauvres et des affligés, Baba lui-même s’attristait ; le cœur de Shri Sai était vaste comme l’océan.

  15. পদ 15

    भक्त एक मद्रासी आया, घर का बहुत बड़ा धनवान। माल खजाना बेहद उसका, केवल नहीं रही सन्तान।

    ভক্ত এক মদ্রাসী আয়া, ঘর কা বহুত বড়া ধনবান। মাল খজানা বেহদ উসকা, কেবল নহীং রহী সন্তান।

    মাদ্রাজ থেকে এক ভক্ত এল, তার ঘরে প্রচুর ধন; তার ধনসম্পদ ছিল অসীম, শুধু সন্তান ছিল না।

    A devotee came from Madras, a man of great wealth in his house; his riches and treasure were boundless, only he had no child.

    मद्रास से एक भक्त आया जो घर का बहुत बड़ा धनवान था; उसके पास अपार धन-सम्पत्ति थी, केवल सन्तान नहीं थी।

    Un fidèle vint de Madras, homme très riche ; ses biens et ses trésors étaient sans limite, seul un enfant lui manquait.

  16. পদ 16

    लगा मनाने साईं नाथ को, बाबा मुझ पर दया करो। झंझा से झंकृत नैया को, तुमहीं मेरी पार करो।

    লগা মনানে সাঈং নাথ কো, বাবা মুঝ পর দয়া করো। ঝংঝা সে ঝংকৃত নৈয়া কো, তুমহীং মেরী পার করো।

    সে সাঁই নাথের কাছে মিনতি করতে লাগল: ‘বাবা, আমার প্রতি দয়া করো; তুমিই একমাত্র আমার ঝড়ে দোলা নৌকা পার করতে পারো।’

    He began to entreat Sai Natha: ‘Baba, have mercy on me; you alone can carry my storm-tossed boat across.’

    वह साईं नाथ को मनाने लगा: बाबा, मुझ पर दया करो; आँधी से डगमगाती मेरी नैया को तुम ही पार लगाओ।

    Il se mit à implorer Sai Natha : « Baba, aie pitié de moi ; toi seul peux mener à l’autre rive ma barque battue par la tempête. »

  17. পদ 17

    कुलदीपक के बिना अंधेरा, छाया हुआ है घर में मेरे। इसलिए आया हूँ बाबा, होकर शरणागत तेरे।

    কুলদীপক কে বিনা অংধেরা, ছায়া হুআ হৈ ঘর মেং মেরে। ইসলিএ আয়া হূঁ বাবা, হোকর শরণাগত তেরে।

    ‘বংশের প্রদীপ ছাড়া আমার ঘরে অন্ধকার ছড়িয়ে পড়েছে; তাই বাবা, আমি তোমার শরণ নিয়ে এসেছি।

    ‘Without a lamp of the family, darkness has spread through my house; so I have come, Baba, taking refuge in you.

    कुल के दीपक के बिना मेरे घर में अँधेरा छाया हुआ है; इसीलिए, बाबा, मैं आपकी शरण में आया हूँ।

    « Sans lampe pour ma lignée, l’obscurité a envahi ma maison ; c’est pourquoi je suis venu, Baba, chercher refuge auprès de toi.

  18. পদ 18

    कुलदीपक के ही अभाव में, व्यर्थ है दौलत की माया। आज भिखारी बनकर बाबा, शरण तुम्हारी मैं आया।

    কুলদীপক কে হী অভাব মেং, ব্যর্থ হৈ দৌলত কী মায়া। আজ ভিখারী বনকর বাবা, শরণ তুম্হারী মৈং আয়া।

    উত্তরাধিকারী ছাড়া ধনের আড়ম্বর বৃথা; আজ বাবা, আমি ভিখারি হয়ে তোমার শরণে এসেছি।

    Without an heir, the show of wealth is in vain; today, Baba, I have come to your refuge as a beggar.

    कुलदीपक के अभाव में धन-दौलत की सारी माया व्यर्थ है; आज, बाबा, मैं भिखारी बनकर तुम्हारी शरण में आया हूँ।

    Sans héritier, le mirage de la richesse est vain ; aujourd’hui, Baba, je viens à ton refuge en mendiant.

  19. পদ 19

    दे-दो मुझको पुत्र-दान, मैं ऋणी रहूँगा जीवन भर। और किसी की आश न मुझको, सिर्फ भरोसा है तुम पर।

    দে-দো মুঝকো পুত্র-দান, মৈং ঋণী রহূঁগা জীবন ভর। ঔর কিসী কী আশ ন মুঝকো, সির্ফ ভরোসা হৈ তুম পর।

    আমাকে পুত্রদান করো, আমি সারাজীবন তোমার ঋণী থাকব; আমি আর কারও দিকে তাকাই না, আমার ভরসা শুধু তোমাতে।’

    Grant me the gift of a son, and I will be in your debt all my life; I look to no one else, my trust is in you alone.’

    मुझे पुत्र का दान दे दो, मैं जीवन भर तुम्हारा ऋणी रहूँगा; मुझे और किसी से आशा नहीं, केवल तुम पर ही भरोसा है।

    Accorde-moi le don d’un fils, et je te serai redevable toute ma vie ; je n’espère en nul autre, ma confiance est en toi seul. »

  20. পদ 20

    अनुनय-विनय बहुत की उसने, चरणों में धरकर के शीश। तब प्रसन्न होकर बाबा ने, दिया भक्त को यह आशीष।

    অনুনয়-বিনয় বহুত কী উসনে, চরণোং মেং ধরকর কে শীশ। তব প্রসন্ন হোকর বাবা নে, দিয়া ভক্ত কো যহ আশীষ।

    সে বাবার চরণে মাথা রেখে বহুক্ষণ মিনতি ও অনুনয় করল; তখন বাবা প্রসন্ন হয়ে ভক্তকে এই আশীর্বাদ দিলেন:

    He pleaded and implored at length, laying his head at Baba’s feet; then Baba, well pleased, gave the devotee this blessing:

    उसने चरणों में शीश रखकर बहुत अनुनय-विनय की; तब बाबा ने प्रसन्न होकर भक्त को यह आशीर्वाद दिया:

    Il supplia longuement, la tête posée à ses pieds ; alors Baba, satisfait, donna au fidèle cette bénédiction :

  21. পদ 21

    अल्ला भला करेगा तेरा, पुत्र जन्म हो तेरे घर। कृपा रहेगी तुझ पर उसकी, और तेरे उस बालक पर।

    অল্লা ভলা করেগা তেরা, পুত্র জন্ম হো তেরে ঘর। কৃপা রহেগী তুঝ পর উসকী, ঔর তেরে উস বালক পর।

    ‘আল্লাহ তোমার মঙ্গল করবেন; তোমার ঘরে পুত্র জন্মাবে; তাঁর কৃপা তোমার ও তোমার সেই সন্তানের উপর থাকবে।’

    ‘Allah will do you good; a son will be born in your house; his grace will rest on you and on that child of yours.’

    अल्लाह तेरा भला करेगा, तेरे घर पुत्र का जन्म होगा; उसकी कृपा तुझ पर और तेरे उस बालक पर बनी रहेगी।

    « Allah te fera du bien ; un fils naîtra dans ta maison ; sa grâce reposera sur toi et sur cet enfant. »

  22. পদ 22

    अब तक नहीं किसी ने पाया, साईं की कृपा का पार। पुत्र रत्न दे मद्रासी को, धन्य किया उसका संसार।

    অব তক নহীং কিসী নে পায়া, সাঈং কী কৃপা কা পার। পুত্র রত্ন দে মদ্রাসী কো, ধন্য কিয়া উসকা সংসার।

    সাঁইয়ের কৃপার সীমা আজও কেউ পায়নি; মাদ্রাজের সেই মানুষকে রত্নের মতো পুত্র দিয়ে তিনি তার সমগ্র জগৎ আশীর্বাদে ভরলেন।

    No one has yet found the limit of Sai’s grace; giving the man from Madras a jewel of a son, he blessed his whole world.

    आज तक किसी ने साईं की कृपा का पार नहीं पाया; मद्रासी भक्त को पुत्र-रत्न देकर उन्होंने उसका संसार धन्य कर दिया।

    Nul n’a encore trouvé la limite de la grâce de Sai ; en donnant au fidèle de Madras un joyau de fils, il combla son monde.

  23. পদ 23

    तन-मन से जो भजे उसी का, जग में होता है उद्धार। साँच को आँच नहीं है कोई, सदा, झूठ की होती हार।

    তন-মন সে জো ভজে উসী কা, জগ মেং হোতা হৈ উদ্ধার। সাঁচ কো আঁচ নহীং হৈ কোঈ, সদা, ঝূঠ কী হোতী হার।

    যে দেহ ও মনে তাঁর পূজা করে, সে এই জগতে উন্নত হয়; সত্য আগুনকে ভয় পায় না, আর মিথ্যা সর্বদা পরাজিত হয়।

    Whoever worships him with body and mind is lifted up in this world; truth fears no fire, and falsehood is always defeated.

    जो तन-मन से उनका भजन करता है, संसार में उसका उद्धार हो जाता है; सच को कोई आँच नहीं, झूठ की सदा हार होती है।

    Quiconque l’adore de corps et d’esprit est relevé en ce monde ; la vérité ne craint aucun feu, et le mensonge est toujours vaincu.

  24. পদ 24

    मैं हूँ सदा सहारे उसके, सदा रहूँगा उसका दास। साईं जैसा प्रभु मिला है, इतनी ही कम है क्या आस।

    মৈং হূঁ সদা সহারে উসকে, সদা রহূঁগা উসকা দাস। সাঈং জৈসা প্রভু মিলা হৈ, ইতনী হী কম হৈ ক্যা আস।

    আমি সর্বদা তাঁর আশ্রয়ে থাকি আর চিরকাল তাঁর সেবক থাকব; সাঁইয়ের মতো প্রভু পেয়ে, সে কি সামান্য আশা?

    I live ever in his shelter and will ever be his servant; having found a lord like Sai, is that a small hope?

    मैं सदा उनके सहारे हूँ और सदा उनका दास रहूँगा; साईं जैसे प्रभु मिल गए हैं, क्या यह आशा कुछ कम है?

    Je vis toujours sous sa protection et serai toujours son serviteur ; avoir trouvé un seigneur tel que Sai, est-ce là un mince espoir ?

  25. পদ 25

    मेरा भी दिन था इक ऐसा, मिलती नहीं मुझे थी रोटी। तन पर कपड़ा दूर रहा था, शेष रही नन्ही सी लंगोटी।

    মেরা ভী দিন থা ইক ঐসা, মিলতী নহীং মুঝে থী রোটী। তন পর কপড়া দূর রহা থা, শেষ রহী নন্হী সী লংগোটী।

    আমারও একদিন এমন দিন ছিল, যখন রুটি পর্যন্ত জুটত না; আমার দেহে বস্ত্র ছিল না, শুধু ছোট্ট একটা কৌপীন বাকি ছিল।

    I too once had such days, when I could not get even bread; my body had no clothing, only a tiny loincloth was left.

    मेरे भी ऐसे दिन थे जब मुझे रोटी तक नहीं मिलती थी; तन पर कपड़ा नहीं था, केवल एक छोटी-सी लंगोटी बची थी।

    Moi aussi j’ai connu des jours où je ne trouvais même pas de pain ; mon corps était sans vêtement, il ne me restait qu’un petit pagne.

  26. পদ 26

    सरिता सन्मुख होने पर भी, मैं प्यासा था। दुर्दिन मेरा मेरे ऊपर, दावाग्नी बरसाता था।

    সরিতা সন্মুখ হোনে পর ভী, মৈং প্যাসা থা। দুর্দিন মেরা মেরে ঊপর, দাবাগ্নী বরসাতা থা।

    সামনে নদী থাকতেও আমি তৃষ্ণার্ত ছিলাম; আমার কঠিন দিনগুলি আমার উপর দাবানল বর্ষণ করল।

    Even with a river before me, I was thirsty; my hard days rained a forest fire down upon me.

    नदी सामने होने पर भी मैं प्यासा था; मेरे बुरे दिन मुझ पर दावानल बरसाते थे।

    Même devant une rivière, j’avais soif ; mes jours de malheur faisaient pleuvoir sur moi un feu de forêt.

  27. পদ 27

    धरती के अतिरिक्त जगत में, मेरा कुछ अवलम्ब न था। बना भिखारी मैं दुनिया में, दर-दर ठोकर खाता था।

    ধরতী কে অতিরিক্ত জগত মেং, মেরা কুছ অবলম্ব ন থা। বনা ভিখারী মৈং দুনিয়া মেং, দর-দর ঠোকর খাতা থা।

    খালি মাটি ছাড়া জগতে আমার কোনও আশ্রয় ছিল না; ভিখারি হয়ে আমি দ্বারে দ্বারে হোঁচট খেয়ে ফিরতাম।

    Apart from the bare earth I had no support in the world; become a beggar, I stumbled from door to door.

    धरती के सिवा संसार में मेरा कोई सहारा न था; भिखारी बनकर मैं दुनिया में द्वार-द्वार ठोकरें खाता था।

    Hormis la terre nue, je n’avais aucun appui au monde ; devenu mendiant, je trébuchais de porte en porte.

  28. পদ 28

    ऐसे में इक मित्र मिला जो, परम भक्त साईं का था। जंजालों से मुक्त मगर, जगती में वह भी मुझ सा था।

    ঐসে মেং ইক মিত্র মিলা জো, পরম ভক্ত সাঈং কা থা। জংজালোং সে মুক্ত মগর, জগতী মেং বহ ভী মুঝ সা থা।

    তখন আমার এক বন্ধুর সঙ্গে দেখা হল, যে সাঁইয়ের পরম ভক্ত; সাংসারিক ফাঁদ থেকে মুক্ত, তবু জগতে সে আমার মতোই গরিব।

    Then I met a friend who was a supreme devotee of Sai; released from worldly snares, yet in the world he was poor like me.

    ऐसे में मुझे एक मित्र मिला जो साईं का परम भक्त था; वह जंजालों से मुक्त था, पर संसार में मेरी ही तरह था।

    Alors je rencontrai un ami, fervent dévot de Sai ; délivré des entraves, il était pourtant dans le monde aussi démuni que moi.

  29. পদ 29

    बाबा के दर्शन की खातिर, मिल दोनों ने किया विचार। साईं जैसे दया मूर्ति के, दर्शन को हो गए तैयार।

    বাবা কে দর্শন কী খাতির, মিল দোনোং নে কিয়া বিচার। সাঈং জৈসে দয়া মূর্তি কে, দর্শন কো হো গএ তৈয়ার।

    বাবার দর্শনের জন্য আমরা দুজন একসঙ্গে পরামর্শ করলাম; আর করুণার প্রতিমূর্তি সাঁইকে দর্শন করতে প্রস্তুত হলাম।

    For Baba’s darshana the two of us took counsel together; and we made ready to behold Sai, the very image of mercy.

    बाबा के दर्शन के लिए हम दोनों ने मिलकर विचार किया; और दया की मूर्ति साईं के दर्शन को तैयार हो गए।

    Pour le darshana de Baba, nous prîmes conseil tous deux ; et nous nous préparâmes à contempler Sai, image même de la miséricorde.

  30. পদ 30

    पावन शिर्डी नगर में जाकर, देखी मतवाली मूरति। धन्य जनम हो गया कि हमने, जब देखी साई की मूरति।

    পাবন শির্ডী নগর মেং জাকর, দেখী মতবালী মূরতি। ধন্য জনম হো গয়া কি হমনে, জব দেখী সাঈ কী মূরতি।

    পবিত্র শিরডি নগরে গিয়ে আমরা তাঁর মনোমুগ্ধকর রূপ দেখলাম; সাঁইয়ের মূর্তি দর্শন করে আমাদের জন্ম ধন্য হল।

    Going to the holy town of Shirdi, we saw his enchanting form; our birth was made blessed when we beheld the image of Sai.

    पावन शिर्डी नगर में जाकर हमने उनकी मनमोहक मूर्ति देखी; जब हमने साईं की मूर्ति देखी तो हमारा जन्म धन्य हो गया।

    Arrivés dans la sainte ville de Shirdi, nous vîmes sa forme enivrante ; notre naissance fut bénie quand nous contemplâmes l’image de Sai.

  31. পদ 31

    जब से किए हैं दर्शन हमने, दुःख सारा काफूर हो गया। संकट सारे मिटे और, विपदाओं का हो अन्त गया।

    জব সে কিএ হৈং দর্শন হমনে, দুঃখ সারা কাফূর হো গয়া। সংকট সারে মিটে ঔর, বিপদাওং কা হো অন্ত গয়া।

    যখন থেকে তাঁর দর্শন পেয়েছি, আমাদের সব দুঃখ মিলিয়ে গেছে; প্রতিটি সংকট মুছে গেল আর আমাদের বিপদ শেষ হল।

    Since we had his darshana, all our sorrow has vanished; every trouble was wiped out and our calamities came to an end.

    जब से हमने दर्शन किए, सारा दुःख मिट गया; सारे संकट दूर हुए और विपत्तियों का अन्त हो गया।

    Depuis que nous avons eu son darshana, toute notre peine s’est dissipée ; tous les maux ont disparu et nos calamités ont pris fin.

  32. পদ 32

    मान और सम्मान मिला, भिक्षा में हमको सब बाबा से। प्रतिबिम्बित हो उठे जगत में, हम साईं की आज्ञा से।

    মান ঔর সম্মান মিলা, ভিক্ষা মেং হমকো সব বাবা সে। প্রতিবিম্বিত হো উঠে জগত মেং, হম সাঈং কী আজ্ঞা সে।

    মান ও সম্মান আমরা বাবার কাছ থেকে ভিক্ষা রূপে পেলাম; সাঁইয়ের আদেশে আমরা জগতে উজ্জ্বল হলাম।

    Honour and respect we received from Baba as alms; by Sai’s command we came to shine in the world.

    बाबा से हमें भिक्षा में मान और सम्मान सब कुछ मिला; साईं की आज्ञा से हम संसार में प्रतिष्ठित हो उठे।

    De Baba nous reçûmes en aumône l’honneur et le respect ; par l’ordre de Sai nous avons rayonné dans le monde.

  33. পদ 33

    बाबा ने सम्मान दिया है, मान दिया इस जीवन में। इसका सम्बल ले मैं, हँसता जाऊँगा जीवन में।

    বাবা নে সম্মান দিয়া হৈ, মান দিয়া ইস জীবন মেং। ইসকা সম্বল লে মৈং, হঁসতা জাঊঁগা জীবন মেং।

    বাবা আমাকে এই জীবনে মান ও মর্যাদা দিয়েছেন; এই আশ্রয়ে ভর করে আমি হাসিমুখে জীবন চালিয়ে যাব।

    Baba has given me honour and esteem in this life; leaning on this support, I will go on through life with a smile.

    बाबा ने इस जीवन में मुझे मान और सम्मान दिया है; इसी का सहारा लेकर मैं जीवन में हँसता हुआ चलता जाऊँगा।

    Baba m’a donné honneur et estime en cette vie ; appuyé sur ce soutien, j’avancerai dans la vie en souriant.

  34. পদ 34

    साईं की लीला का मेरे, मन पर ऐसा असर हुआ। लगता, जगती के कण-कण में, जैसे हो वह भरा हुआ।

    সাঈং কী লীলা কা মেরে, মন পর ঐসা অসর হুআ। লগতা, জগতী কে কণ-কণ মেং, জৈসে হো বহ ভরা হুআ।

    সাঁইয়ের দিব্য লীলা আমার মনকে এমন স্পর্শ করল যে মনে হয় তিনি জগতের প্রতিটি কণায় পূর্ণ।

    Sai’s divine play so touched my mind that he seems to fill every particle of the world.

    साईं की लीला का मेरे मन पर ऐसा प्रभाव हुआ कि लगता है जैसे वे जगत के कण-कण में भरे हुए हैं।

    Le jeu divin de Sai a tant marqué mon esprit qu’il semble emplir chaque parcelle du monde.

  35. পদ 35

    'काशीराम' बाबा का भक्त, इस शिर्डी में रहता था। मैं साईं का, साईं मेरा, वह दुनिया से कहता था।

    'কাশীরাম' বাবা কা ভক্ত, ইস শির্ডী মেং রহতা থা। মৈং সাঈং কা, সাঈং মেরা, বহ দুনিয়া সে কহতা থা।

    বাবার ভক্ত কাশীরাম এই শিরডিতে থাকতেন; ‘আমি সাঁইয়ের আর সাঁই আমার,’ তিনি জগৎকে বলতেন।

    Kashiram, a devotee of Baba, lived in this Shirdi; ‘I am Sai’s and Sai is mine,’ he would tell the world.

    बाबा का भक्त ‘काशीराम’ इसी शिर्डी में रहता था; वह दुनिया से कहता था: मैं साईं का हूँ, साईं मेरे हैं।

    Kashiram, dévot de Baba, vivait à Shirdi ; « Je suis à Sai et Sai est à moi », disait-il au monde.

  36. পদ 36

    सिलकर स्वयं वस्त्र बेचता, ग्राम-नगर बाजारों में। झंकृति उसकी हृदय तन्त्री थी, साईं की झंकारों में।

    সিলকর স্বয়ং বস্ত্র বেচতা, গ্রাম-নগর বাজারোং মেং। ঝংকৃতি উসকী হৃদয় তন্ত্রী থী, সাঈং কী ঝংকারোং মেং।

    তিনি নিজের হাতে কাপড় সেলাই করে গ্রাম ও নগরের হাটে বিক্রি করতেন; তাঁর হৃদয়ের তার সাঁইয়ের সুরে বাজত।

    He sewed clothes with his own hands and sold them in the markets of villages and towns; the strings of his heart rang with the music of Sai.

    वह स्वयं कपड़े सिलकर गाँव-नगर के बाज़ारों में बेचता था; उसके हृदय की वीणा साईं की झंकार से झंकृत रहती थी।

    Il cousait lui-même des vêtements et les vendait aux marchés des villages et des villes ; les cordes de son cœur vibraient au chant de Sai.

  37. পদ 37

    स्तब्ध निशा थी, थे सोये, रजनी अंचल में चाँद सितारे। नहीं सूझता रहा हाथ को हाथ, तिमिरि के मारे।

    স্তব্ধ নিশা থী, থে সোয়ে, রজনী অংচল মেং চাঁদ সিতারে। নহীং সূঝতা রহা হাথ কো হাথ, তিমিরি কে মারে।

    রাত নিস্তব্ধ ছিল; চাঁদ ও তারা অন্ধকারের কোলে ঘুমিয়ে ছিল; কালো আঁধারে হাত থেকে হাত দেখা যেত না।

    The night was still; moon and stars slept in the lap of the dark; in the blackness one could not see hand from hand.

    रात सन्नाटे भरी थी, रात्रि की गोद में चाँद-सितारे सोए थे; अँधेरे के कारण हाथ को हाथ नहीं सूझता था।

    La nuit était silencieuse ; lune et étoiles dormaient au giron de l’ombre ; dans le noir, on ne voyait pas sa main devant soi.

  38. পদ 38

    वस्त्र बेचकर लौट रहा था, हाय! हाट से 'काशी'। विचित्र बड़ा संयोग कि उस दिन, आता था वह एकाकी।

    বস্ত্র বেচকর লৌট রহা থা, হায়! হাট সে 'কাশী'। বিচিত্র বড়া সংয়োগ কি উস দিন, আতা থা বহ একাকী।

    হায়, কাপড় বিক্রি করে কাশী হাট থেকে ফিরছিলেন; অদ্ভুত সংযোগে সেদিন তিনি একা আসছিলেন।

    Alas, having sold his clothes, Kashi was returning from the market; by a strange chance, that day he was coming alone.

    हाय! कपड़े बेचकर काशी बाज़ार से लौट रहा था; बड़ा विचित्र संयोग था कि उस दिन वह अकेला आ रहा था।

    Hélas, ses vêtements vendus, Kashi revenait du marché ; étrange hasard, ce jour-là il rentrait seul.

  39. পদ 39

    घेर राह में खड़े हो गए, उसे कुटिल अन्यायी। मारो काटो लूट लो इसको, इसकी ही ध्वनि पड़ी सुनाई।

    ঘের রাহ মেং খড়ে হো গএ, উসে কুটিল অন্যায়ী। মারো কাটো লূট লো ইসকো, ইসকী হী ধ্বনি পড়ী সুনাঈ।

    কুটিল দুর্বৃত্তরা পথে তাঁকে ঘিরে দাঁড়াল; ‘মারো, কাটো, লুটো!’ ছাড়া কিছু শোনা গেল না।

    Crooked wrongdoers stood surrounding him on the road; ‘Beat him, cut him, rob him!’ was all that could be heard.

    कुटिल अन्यायी रास्ते में उसे घेरकर खड़े हो गए; ‘मारो, काटो, लूट लो इसको’, बस यही आवाज़ सुनाई दी।

    Des malfaiteurs perfides l’encerclèrent sur la route ; « Frappez-le, tranchez, dépouillez-le ! », on n’entendait que cela.

  40. পদ 40

    लूट पीटकर उसे वहाँ से, कुटिल गये चम्पत हो। आघातों से मर्माहत हो, उसने दी थी संज्ञा खो।

    লূট পীটকর উসে বহাঁ সে, কুটিল গয়ে চম্পত হো। আঘাতোং সে মর্মাহত হো, উসনে দী থী সংজ্ঞা খো।

    তাঁকে লুট করে ও মেরে দুর্বৃত্তরা সেখান থেকে পালাল; আঘাতে মর্মান্তিক আহত হয়ে তিনি জ্ঞান হারালেন।

    Having robbed and beaten him, the villains fled from there; wounded to the core by the blows, he lost consciousness.

    उसे लूट-पीटकर वे दुष्ट वहाँ से चम्पत हो गए; चोटों से मर्माहत होकर वह बेहोश हो गया।

    L’ayant volé et battu, les scélérats s’enfuirent ; blessé au plus profond par les coups, il perdit connaissance.

  41. পদ 41

    बहुत देर तक पड़ा रहा वह, वहीं उसी हालत में। जाने कब कुछ हो उठा, उसको किसी पलक में।

    বহুত দের তক পড়া রহা বহ, বহীং উসী হালত মেং। জানে কব কুছ হো উঠা, উসকো কিসী পলক মেং।

    অনেকক্ষণ তিনি সেই অবস্থায় সেখানে পড়ে রইলেন; তারপর কোনও এক মুহূর্তে, কে জানে কখন, তিনি একটু নড়লেন।

    For a long time he lay there in that same state; then at some moment, who knows when, he stirred a little.

    बहुत देर तक वह उसी हालत में वहीं पड़ा रहा; फिर न जाने कब, किसी पल उसे कुछ होश आया।

    Longtemps il resta étendu là, dans cet état ; puis, à un instant, nul ne sait quand, il remua un peu.

  42. পদ 42

    अनजाने ही उसके मुँह से, निकल पड़ा था साईं। जिसकी प्रतिध्वनि शिर्डी में, बाबा को पड़ी सुनाई।

    অনজানে হী উসকে মুঁহ সে, নিকল পড়া থা সাঈং। জিসকী প্রতিধ্বনি শির্ডী মেং, বাবা কো পড়ী সুনাঈ।

    অজান্তে তাঁর ঠোঁট থেকে ‘সাঁই’ শব্দটি বেরিয়ে এল; আর তার প্রতিধ্বনি শিরডিতে বাবার কাছে পৌঁছল।

    Unknowingly the word ‘Sai’ escaped his lips; and its echo reached Baba in Shirdi.

    अनजाने में ही उसके मुँह से ‘साईं’ निकल पड़ा; जिसकी प्रतिध्वनि शिर्डी में बाबा को सुनाई दी।

    Sans le savoir, le nom « Sai » s’échappa de ses lèvres ; et son écho parvint à Baba, à Shirdi.

  43. পদ 43

    क्षुब्ध हो उठा मानस उनका, बाबा गए विकल हो। लगता जैसा घटना सारी, घटी उन्हीं के सन्मुख हो।

    ক্ষুব্ধ হো উঠা মানস উনকা, বাবা গএ বিকল হো। লগতা জৈসা ঘটনা সারী, ঘটী উন্হীং কে সন্মুখ হো।

    তাঁর মন কেঁপে উঠল আর বাবা অস্থির হয়ে উঠলেন, যেন পুরো ঘটনাটি তাঁর চোখের সামনেই ঘটেছে।

    His mind was shaken and Baba grew restless, as though the whole event had taken place before his very eyes.

    उनका मन क्षुब्ध हो उठा और बाबा व्याकुल हो गए; मानो सारी घटना उन्हीं के सामने घटी हो।

    Son esprit fut troublé et Baba devint agité, comme si toute la scène s’était déroulée sous ses yeux.

  44. পদ 44

    उन्मादी से इधर उधर तब, बाबा लगे भटकने। सन्मुख चीजें जो भी आई, उनको लगे पटकने।

    উন্মাদী সে ইধর উধর তব, বাবা লগে ভটকনে। সন্মুখ চীজেং জো ভী আঈ, উনকো লগে পটকনে।

    তখন বাবা যেন উন্মত্তের মতো এদিক-ওদিক ঘুরতে লাগলেন; সামনে যা পেলেন তাই ছুড়ে ফেলতে লাগলেন।

    Then, as if frenzied, Baba began to wander here and there; whatever came before him he began to fling down.

    तब बाबा उन्मादी की तरह इधर-उधर भटकने लगे; जो भी चीज़ें सामने आईं, उन्हें पटकने लगे।

    Alors, comme pris de frénésie, Baba se mit à aller çà et là ; tout ce qui se présentait devant lui, il le jetait à terre.

  45. পদ 45

    और धधकते अंगारों में, बाबा ने कर डाला। हुए सशंकित सभी वहाँ, लख ताण्डव नृत्य निराला।

    ঔর ধধকতে অংগারোং মেং, বাবা নে কর ডালা। হুএ সশংকিত সভী বহাঁ, লখ তাণ্ডব নৃত্য নিরালা।

    আর বাবা জ্বলন্ত অঙ্গারে হাত ঢুকিয়ে দিলেন; সেই অদ্ভুত তাণ্ডবনৃত্য দেখে উপস্থিত সকলে আতঙ্কিত হল।

    And Baba thrust his hand into the blazing embers; all present were alarmed, beholding that strange tandava dance.

    और बाबा ने धधकते अंगारों में अपना हाथ डाल दिया; वह निराला ताण्डव-नृत्य देखकर वहाँ सभी आशंकित हो उठे।

    Et Baba plongea la main dans les braises ardentes ; tous furent saisis d’effroi devant cette étrange danse tandava.

  46. পদ 46

    समझ गये सब लोग कि कोई, भक्त पड़ा संकट में। क्षुभित खड़े थे सभी वहाँ पर, पड़े हुए विस्मय में।

    সমঝ গয়ে সব লোগ কি কোঈ, ভক্ত পড়া সংকট মেং। ক্ষুভিত খড়ে থে সভী বহাঁ পর, পড়ে হুএ বিস্ময় মেং।

    সকলে বুঝল কোনও ভক্ত বিপদে পড়েছে; সকলে কম্পিত হয়ে বিস্ময়ে হারিয়ে দাঁড়িয়ে রইল।

    Everyone understood that some devotee had fallen into danger; all stood there shaken, lost in wonder.

    सब लोग समझ गए कि कोई भक्त संकट में पड़ा है; सभी वहाँ व्याकुल और विस्मित खड़े थे।

    Tous comprirent qu’un fidèle était en péril ; tous se tenaient là, bouleversés, frappés de stupeur.

  47. পদ 47

    उसे बचाने की ही खातिर, बाबा आज विकल हैं। उसकी ही पीड़ा से पीड़ित, उनका अन्तस्तल है।

    উসে বচানে কী হী খাতির, বাবা আজ বিকল হৈং। উসকী হী পীড়া সে পীড়িত, উনকা অন্তস্তল হৈ।

    তাকে বাঁচাতেই বাবা আজ এত অস্থির; তাঁর অন্তরাত্মা সেই ভক্তের ব্যথায় ব্যথিত।

    It is to save him that Baba is so restless today; his inmost heart suffers with that devotee’s pain.

    उसी को बचाने के लिए आज बाबा व्याकुल हैं; उसकी पीड़ा से उनका अन्तःकरण पीड़ित है।

    C’est pour le sauver que Baba est si agité aujourd’hui ; son cœur profond souffre de la douleur de ce fidèle.

  48. পদ 48

    इतने में ही विधि ने, अपनी विचित्रता दिखलाई। लख कर जिसको जनता की, श्रद्धा सरिता लहराई।

    ইতনে মেং হী বিধি নে, অপনী বিচিত্রতা দিখলাঈ। লখ কর জিসকো জনতা কী, শ্রদ্ধা সরিতা লহরাঈ।

    ঠিক তখনই নিয়তি তার বিস্ময় প্রকাশ করল; তা দেখে মানুষের বিশ্বাসের নদী তরঙ্গে উথলে উঠল।

    Just then destiny revealed its wonder; seeing it, the river of the people’s faith rose in waves.

    इतने में ही विधाता ने अपनी विचित्र लीला दिखाई; जिसे देखकर जनता की श्रद्धा की नदी लहरा उठी।

    À cet instant, le destin révéla sa merveille ; en la voyant, le fleuve de la foi du peuple se souleva.

  49. পদ 49

    लेकर संज्ञाहीन भक्त को, गाड़ी एक वहाँ आई। सन्मुख अपने देखा भक्त को, साईं की आँखें भर आई।

    লেকর সংজ্ঞাহীন ভক্ত কো, গাড়ী এক বহাঁ আঈ। সন্মুখ অপনে দেখা ভক্ত কো, সাঈং কী আঁখেং ভর আঈ।

    অচেতন ভক্তকে নিয়ে একটি গাড়ি সেখানে পৌঁছল; সামনে নিজের ভক্তকে দেখে সাঁইয়ের চোখ জলে ভরে গেল।

    A cart arrived there bearing the unconscious devotee; seeing his devotee before him, Sai’s eyes filled with tears.

    बेहोश भक्त को लेकर एक गाड़ी वहाँ आई; अपने भक्त को सामने देखकर साईं की आँखें भर आईं।

    Une charrette arriva, portant le fidèle inconscient ; voyant son dévot devant lui, Sai eut les yeux pleins de larmes.

  50. পদ 50

    शान्त, धीर, गंभीर सिन्धु सा, बाबा का अन्तस्तल। आज न जाने क्यों रह-रह, हो जाता था चंचल।

    শান্ত, ধীর, গংভীর সিন্ধু সা, বাবা কা অন্তস্তল। আজ ন জানে ক্যোং রহ-রহ, হো জাতা থা চংচল।

    বাবার অন্তরাত্মা, সাগরের মতো শান্ত, স্থির ও গভীর, আজ কে জানে কেন বারবার আলোড়িত হচ্ছিল।

    Baba’s inmost heart, calm, steady and deep as the sea, today, who knows why, kept stirring again and again.

    बाबा का अन्तःकरण, जो समुद्र जैसा शान्त, धीर और गम्भीर था, आज न जाने क्यों बार-बार चंचल हो उठता था।

    Le cœur profond de Baba, calme, ferme et profond comme la mer, aujourd’hui, nul ne sait pourquoi, s’agitait sans cesse.

  51. পদ 51

    आज दया की मूर्ति स्वयं था, बना हुआ उपचारी। और भक्त के लिये आज था, देव बना प्रतिहारी।

    আজ দয়া কী মূর্তি স্বয়ং থা, বনা হুআ উপচারী। ঔর ভক্ত কে লিয়ে আজ থা, দেব বনা প্রতিহারী।

    আজ করুণার প্রতিমূর্তি স্বয়ং চিকিৎসক হয়েছেন; আর নিজের ভক্তের জন্য ঈশ্বর দ্বারের প্রহরী হয়েছেন।

    Today the very image of mercy had himself become the healer; and for his devotee the god had become a guardian at the door.

    आज दया की मूर्ति स्वयं उपचार करने वाले बने हुए थे; और भक्त के लिए आज देवता स्वयं द्वारपाल बन गए थे।

    Aujourd’hui l’image même de la miséricorde s’était faite guérisseur ; et pour son fidèle, le dieu s’était fait gardien.

  52. পদ 52

    आज भक्ति की विषम परीक्षा में, सफल हुआ था काशी। उसके ही दर्शन की खातिर, थे उमड़े नगर-निवासी।

    আজ ভক্তি কী বিষম পরীক্ষা মেং, সফল হুআ থা কাশী। উসকে হী দর্শন কী খাতির, থে উমড়ে নগর-নিবাসী।

    আজ কাশী ভক্তির কঠিন পরীক্ষায় উত্তীর্ণ হলেন; নগরবাসী শুধু তাঁকে দেখতে ভিড় করল।

    Today Kashi had passed the hard test of devotion; the townsfolk thronged just to see him.

    आज काशी भक्ति की कठिन परीक्षा में सफल हुआ था; उसी के दर्शन के लिए नगरवासी उमड़ पड़े थे।

    Aujourd’hui Kashi avait réussi la dure épreuve de la dévotion ; les habitants de la ville affluaient pour le voir.

  53. পদ 53

    जब भी और जहाँ भी कोई, भक्त पड़े संकट में। उसकी रक्षा करने बाबा, जाते हैं पलभर में।

    জব ভী ঔর জহাঁ ভী কোঈ, ভক্ত পড়ে সংকট মেং। উসকী রক্ষা করনে বাবা, জাতে হৈং পলভর মেং।

    যখনই যেখানেই কোনও ভক্ত সংকটে পড়ে, বাবা এক নিমেষে তাকে রক্ষা করতে যান।

    Whenever and wherever a devotee falls into trouble, Baba goes in an instant to protect him.

    जब भी और जहाँ भी कोई भक्त संकट में पड़ता है, बाबा पलभर में उसकी रक्षा करने पहुँच जाते हैं।

    Où que ce soit et quand que ce soit qu’un fidèle tombe dans le malheur, Baba accourt en un instant pour le protéger.

  54. পদ 54

    युग-युग का है सत्य यह, नहीं कोई नई कहानी। आपदग्रस्त भक्त जब होता, जाते खुद अन्तर्यामी।

    যুগ-য়ুগ কা হৈ সত্য যহ, নহীং কোঈ নঈ কহানী। আপদগ্রস্ত ভক্ত জব হোতা, জাতে খুদ অন্তর্যামী।

    এ প্রতিটি যুগের সত্য, নতুন কোনও কথা নয়: ভক্ত বিপদে পড়লে অন্তর্যামী নিজে তার কাছে যান।

    This is the truth of every age, no new tale: when a devotee is in distress, the Knower of hearts goes to him himself.

    यह युग-युग का सत्य है, कोई नई कहानी नहीं: जब भक्त विपत्ति में होता है, तो अन्तर्यामी स्वयं उसके पास जाते हैं।

    C’est la vérité de tous les âges, nul conte nouveau : quand un fidèle est en détresse, Celui qui connaît les cœurs vient lui-même à lui.

  55. পদ 55

    भेद-भाव से परे पुजारी, मानवता के थे साईं। जितने प्यारे हिन्दू-मुस्लिम, उतने ही थे सिख ईसाई।

    ভেদ-ভাব সে পরে পুজারী, মানবতা কে থে সাঈং। জিতনে প্যারে হিন্দূ-মুস্লিম, উতনে হী থে সিখ ঈসাঈ।

    সব ভেদের ঊর্ধ্বে, সাঁই ছিলেন মানবতার উপাসক; হিন্দু ও মুসলমান তাঁর কাছে শিখ ও খ্রিস্টানের মতোই প্রিয় ছিল।

    Beyond all division, Sai was a worshipper of humanity; Hindus and Muslims were as dear to him as Sikhs and Christians.

    भेदभाव से परे साईं मानवता के पुजारी थे; हिन्दू-मुसलमान उन्हें जितने प्यारे थे, उतने ही सिख और ईसाई भी।

    Au-delà de toute division, Sai était un adorateur de l’humanité ; Hindous et Musulmans lui étaient aussi chers que Sikhs et Chrétiens.

  56. পদ 56

    भेद-भाव मन्दिर-मस्जिद का तोड़-फोड़ बाबा ने डाला। राम रहीम सभी उनके थे, कृष्ण करीम अल्लाताला।

    ভেদ-ভাব মন্দির-মস্জিদ কা তোড়-ফোড় বাবা নে ডালা। রাম রহীম সভী উনকে থে, কৃষ্ণ করীম অল্লাতালা।

    বাবা মন্দির ও মসজিদের ভেদ ভেঙে দিলেন; রাম ও রহিম সবই তাঁর, কৃষ্ণ, করিম ও সর্বোচ্চ আল্লাহ।

    Baba broke down the divide between temple and mosque; Rama and Rahim were all his, Krishna, Karim and Allah the Most High.

    बाबा ने मन्दिर और मस्जिद का भेदभाव तोड़ डाला; राम-रहीम, कृष्ण-करीम और अल्लाह-तआला सभी उनके अपने थे।

    Baba abattit la séparation entre temple et mosquée ; Rama et Rahim étaient tous siens, Krishna, Karim et Allah le Très-Haut.

  57. পদ 57

    घण्टे की प्रतिध्वनि से गूंजा, मस्जिद का कोना-कोना। मिले परस्पर हिन्दू-मुस्लिम, प्यार बढ़ा दिन-दिन दूना।

    ঘণ্টে কী প্রতিধ্বনি সে গূংজা, মস্জিদ কা কোনা-কোনা। মিলে পরস্পর হিন্দূ-মুস্লিম, প্যার বঢ়া দিন-দিন দূনা।

    মসজিদের প্রতিটি কোণ ঘণ্টার প্রতিধ্বনিতে বেজে উঠল; হিন্দু ও মুসলমান একসঙ্গে মিলল, আর তাদের ভালোবাসা দিনে দিনে দ্বিগুণ হল।

    Every corner of the mosque rang with the echo of the bell; Hindus and Muslims met together, and their love doubled day by day.

    मस्जिद का कोना-कोना घण्टे की ध्वनि से गूँज उठा; हिन्दू-मुसलमान आपस में मिले और प्रेम दिन-दिन दूना बढ़ा।

    Chaque recoin de la mosquée résonna de l’écho de la cloche ; Hindous et Musulmans se rencontrèrent, et leur amour doubla de jour en jour.

  58. পদ 58

    चमत्कार था कितना सुन्दर, परिचय इस काया ने दी। और नीम कड़ुवाहट में भी, मिठास बाबा ने भर दी।

    চমত্কার থা কিতনা সুন্দর, পরিচয় ইস কায়া নে দী। ঔর নীম কড়ুবাহট মেং ভী, মিঠাস বাবা নে ভর দী।

    এই রূপ কী সুন্দর অলৌকিকতা প্রকাশ করল: বাবা নিমের তিক্ততাকেও মিষ্টতায় ভরে দিলেন।

    How beautiful a miracle this form revealed: Baba filled even the bitterness of neem with sweetness.

    इस काया ने कितना सुन्दर चमत्कार दिखाया; बाबा ने नीम की कड़वाहट में भी मिठास भर दी।

    Quel beau miracle cette forme révéla : Baba emplit de douceur jusqu’à l’amertume du margousier.

  59. পদ 59

    सच को स्नेह दिया साईं ने, सबको अनतुल प्यार किया। जो कुछ जिसने भी चाहा, बाबा ने उसको वही दिया।

    সচ কো স্নেহ দিয়া সাঈং নে, সবকো অনতুল প্যার কিয়া। জো কুছ জিসনে ভী চাহা, বাবা নে উসকো বহী দিয়া।

    সাঁই সত্যকে স্নেহ দিলেন আর সকলকে অপরিমেয় ভালোবাসলেন; কেউ যা কামনা করত, বাবা তাকে সেটাই দিতেন।

    Sai gave his affection to truth and loved all beyond measure; whatever anyone wished for, Baba gave him that very thing.

    साईं ने सत्य को स्नेह दिया और सबसे अतुलनीय प्रेम किया; जिसने जो चाहा, बाबा ने उसे वही दिया।

    Sai donna son affection à la vérité et aima tous sans mesure ; ce que chacun désirait, Baba le lui donnait.

  60. পদ 60

    ऐसे स्नेह शील भाजन का, नाम सदा जो जपा करे। पर्वत जैसा दुःख न क्यों हो, पलभर में वह दूर टरे।

    ঐসে স্নেহ শীল ভাজন কা, নাম সদা জো জপা করে। পর্বত জৈসা দুঃখ ন ক্যোং হো, পলভর মেং বহ দূর টরে।

    যে সেই প্রেম ও গুণের আধারের নাম সর্বদা জপ করে, পর্বতের মতো বিশাল দুঃখও এক মুহূর্তে তার থেকে চলে যায়।

    Whoever ever chants the name of that vessel of love and virtue, even sorrow as great as a mountain passes from him in a moment.

    ऐसे स्नेह और शील के आधार का नाम जो सदा जपता है, उसका पर्वत जैसा दुःख भी पलभर में दूर हो जाता है।

    Quiconque répète sans cesse le nom de ce réceptacle d’amour et de vertu, même une peine haute comme une montagne s’éloigne de lui en un instant.

  61. পদ 61

    साईं जैसा दाता, अरे कभी नहीं देखा कोई। जिसके केवल दर्शन से ही, सारी विपदा दूर गई।

    সাঈং জৈসা দাতা, অরে কভী নহীং দেখা কোঈ। জিসকে কেবল দর্শন সে হী, সারী বিপদা দূর গঈ।

    সাঁইয়ের মতো দাতা কেউ কখনো দেখেনি, যাঁর শুধু দর্শনেই প্রতিটি বিপদ দূর হয়ে গেল।

    Never has anyone seen a giver like Sai, by whose mere darshana every calamity departed.

    साईं जैसा दाता कभी किसी ने नहीं देखा, जिनके केवल दर्शन से ही सारी विपदा दूर हो गई।

    Jamais on n’a vu un donateur tel que Sai, dont le seul darshana dissipait toute calamité.

  62. পদ 62

    तन में साईं, मन में साईं, साईं-साईं भजा करो। अपने तन की सुधि-बुधि खोकर सुधि उसकी तुम किया करो।

    তন মেং সাঈং, মন মেং সাঈং, সাঈং-সাঈং ভজা করো। অপনে তন কী সুধি-বুধি খোকর সুধি উসকী তুম কিয়া করো।

    দেহে সাঁই, মনে সাঁই: ‘সাঁই, সাঁই’ জপ করে যাও; নিজের দেহের সব চিন্তা হারিয়ে তাঁকে স্মরণে রাখো।

    Sai in the body, Sai in the mind: keep chanting ‘Sai, Sai’; losing all thought of your own body, keep him in your remembrance.

    तन में साईं, मन में साईं, साईं-साईं जपा करो; अपने तन की सुध-बुध खोकर उन्हीं का स्मरण किया करो।

    Sai dans le corps, Sai dans l’esprit : répétez sans cesse « Sai, Sai » ; oubliant votre propre corps, gardez-le en mémoire.

  63. পদ 63

    जब तू अपनी सुधियाँ तजकर, बाबा की सुधि किया करेगा। और रात-दिन बाबा, बाबा, बाबा ही तू रटा करेगा।

    জব তূ অপনী সুধিয়াঁ তজকর, বাবা কী সুধি কিয়া করেগা। ঔর রাত-দিন বাবা, বাবা, বাবা হী তূ রটা করেগা।

    যখন তুমি নিজের সব চিন্তা সরিয়ে রেখে বাবার স্মরণে ডুবে থাকো, আর দিবারাত্রি শুধু ‘বাবা, বাবা, বাবা’ জপ করতে থাকো,

    When you set aside all thought of yourself and dwell on Baba in remembrance, and night and day keep repeating only ‘Baba, Baba, Baba’,

    जब तू अपनी सुध छोड़कर बाबा का स्मरण करेगा, और रात-दिन केवल ‘बाबा, बाबा, बाबा’ ही रटेगा,

    Quand tu renonceras à penser à toi pour te souvenir de Baba, et que nuit et jour tu ne répéteras que « Baba, Baba, Baba »,

  64. পদ 64

    तो बाबा को अरे! विवश हो, सुधि तेरी लेनी ही होगी। तेरी हर इच्छा बाबा को पूरी ही करनी होगी।

    তো বাবা কো অরে! বিবশ হো, সুধি তেরী লেনী হী হোগী। তেরী হর ইচ্ছা বাবা কো পূরী হী করনী হোগী।

    তখন বাবা তোমার ভালোবাসায় বাঁধা পড়ে তোমার যত্ন নিতে বাধ্য হবেন; বাবাকে তোমার প্রতিটি কামনা পূর্ণ করতেই হবে।

    then Baba, bound by your love, will have to take care of you; Baba will have to fulfil your every wish.

    तब बाबा को विवश होकर तेरी सुध लेनी ही होगी; तेरी हर इच्छा बाबा को पूरी करनी ही होगी।

    alors Baba, lié par ton amour, devra prendre soin de toi ; Baba devra exaucer chacun de tes vœux.

  65. পদ 65

    जंगल जंगल भटक न पागल, और ढूँढ़ने बाबा को। एक जगह केवल शिर्डी में, तू पायेगा बाबा को।

    জংগল জংগল ভটক ন পাগল, ঔর ঢূঁঢ়নে বাবা কো। এক জগহ কেবল শির্ডী মেং, তূ পায়েগা বাবা কো।

    হে মূর্খ, বাবাকে খুঁজতে বনে বনে ঘুরো না; একমাত্র এক জায়গায়, শিরডিতে, তুমি বাবাকে পাবে।

    Do not wander, foolish one, from forest to forest searching for Baba; in one place alone, in Shirdi, you will find Baba.

    हे पागल, बाबा को ढूँढ़ने के लिए जंगल-जंगल मत भटक; केवल एक जगह, शिर्डी में, तू बाबा को पाएगा।

    Ne va pas, insensé, de forêt en forêt chercher Baba ; en un seul lieu, à Shirdi, tu trouveras Baba.

  66. পদ 66

    धन्य जगत में प्राणी है वह, जिसने बाबा को पाया। दुःख में, सुख में प्रहर आठ हो, साई का हो गुण गाया।

    ধন্য জগত মেং প্রাণী হৈ বহ, জিসনে বাবা কো পায়া। দুঃখ মেং, সুখ মেং প্রহর আঠ হো, সাঈ কা হো গুণ গায়া।

    এই জগতে ধন্য সেই আত্মা যে বাবাকে পেয়েছে, আর যে দুঃখে ও সুখে, আট প্রহর জুড়ে সাঁইয়ের গুণগান গেয়েছে।

    Blessed in this world is the soul who has found Baba, and who in sorrow and in joy, through all the eight watches, has sung Sai’s praises.

    संसार में वह प्राणी धन्य है जिसने बाबा को पा लिया, और जिसने दुःख-सुख में आठों पहर साईं का गुणगान किया।

    Bénie en ce monde est l’âme qui a trouvé Baba, et qui, dans la peine comme dans la joie, à toute heure, a chanté les louanges de Sai.

  67. পদ 67

    गिरें संकटों के पर्वत चाहे, या बिजली ही टूट पड़े। साईं का ले नाम सदा तुम, सन्मुख सब के रहो अड़े।

    গিরেং সংকটোং কে পর্বত চাহে, যা বিজলী হী টূট পড়ে। সাঈং কা লে নাম সদা তুম, সন্মুখ সব কে রহো অড়ে।

    সংকটের পাহাড় ভেঙে পড়ুক বা স্বয়ং বজ্র আঘাত করুক, সর্বদা সাঁইয়ের নাম নাও আর সবকিছুর সামনে দৃঢ় দাঁড়াও।

    Whether mountains of trouble fall or lightning itself strikes, take Sai’s name always and stand firm before them all.

    चाहे संकटों के पर्वत गिरें या बिजली ही टूट पड़े, सदा साईं का नाम लेकर तुम सबके सामने डटे रहो।

    Que s’abattent des montagnes de malheurs ou que la foudre elle-même tombe, prenez toujours le nom de Sai et tenez ferme devant tout.

  68. পদ 68

    इस बूढ़े की सुन करामात, तुम हो जावोगे हैरान। दंग रह गए सुन कर जिसको, जाने कितने चतुर सुजान।

    ইস বূঢ়ে কী সুন করামাত, তুম হো জাবোগে হৈরান। দংগ রহ গএ সুন কর জিসকো, জানে কিতনে চতুর সুজান।

    এই বৃদ্ধের এক আশ্চর্য কথা শোনো, তুমি বিস্মিত হবে; অনেক চতুর ও জ্ঞানী তা শুনে হতবাক হয়েছে।

    Hear a wonder of this old man and you will be amazed; many a clever and wise one was left astonished on hearing it.

    इस बूढ़े बाबा की करामात सुनकर तुम हैरान हो जाओगे; जिसे सुनकर न जाने कितने चतुर और ज्ञानी दंग रह गए।

    Écoutez un prodige de ce vieillard et vous serez émerveillés ; bien des gens habiles et sages en restèrent stupéfaits.

  69. পদ 69

    एक बार शिर्डी में साधु, ढोंगी था कोई आया। भोली-भाली नगर-निवासी, जनता को था भरमाया।

    এক বার শির্ডী মেং সাধু, ঢোংগী থা কোঈ আয়া। ভোলী-ভালী নগর-নিবাসী, জনতা কো থা ভরমায়া।

    একবার শিরডিতে এক সাধু এল, এক প্রতারক; সে নগরের সরল, নিষ্পাপ মানুষদের ঠকাল।

    Once a sadhu came to Shirdi, a fraud; he deceived the simple, innocent people of the town.

    एक बार शिर्डी में कोई ढोंगी साधु आया; उसने भोली-भाली नगरवासी जनता को भरमा लिया।

    Un jour un sadhu vint à Shirdi, un imposteur ; il égara les gens simples et naïfs de la ville.

  70. পদ 70

    जड़ी-बूटियाँ उन्हें दिखा कर, करने लगा वहाँ भाषण। कहने लगा सुनो श्रोतागण, घर मेरा है वृन्दावन।

    জড়ী-বূটিয়াঁ উন্হেং দিখা কর, করনে লগা বহাঁ ভাষণ। কহনে লগা সুনো শ্রোতাগণ, ঘর মেরা হৈ বৃন্দাবন।

    তাদের জড়িবুটি দেখিয়ে সে বক্তৃতা দিতে লাগল: ‘শোনো ভালো মানুষেরা, আমার বাড়ি বৃন্দাবন।

    Showing them herbs and roots, he began to make a speech: ‘Listen, good people, my home is Vrindavana.

    उन्हें जड़ी-बूटियाँ दिखाकर वह वहाँ भाषण देने लगा; कहने लगा: सुनो श्रोताओ, मेरा घर वृन्दावन है।

    Leur montrant des herbes et des racines, il se mit à haranguer : « Écoutez, bonnes gens, ma demeure est Vrindavana.

  71. পদ 71

    औषधि मेरे पास एक है, और अजब इसमें शक्ति। इसके सेवन करने से ही, हो जाती दुःख से मुक्ति।

    ঔষধি মেরে পাস এক হৈ, ঔর অজব ইসমেং শক্তি। ইসকে সেবন করনে সে হী, হো জাতী দুঃখ সে মুক্তি।

    আমার কাছে এক ওষুধ আছে যার মধ্যে অপূর্ব শক্তি; তা খেলে দুঃখ থেকে মুক্তি মেলে।

    I have a medicine with wondrous power in it; by taking it one is released from sorrow.

    मेरे पास एक औषधि है और इसमें अद्भुत शक्ति है; इसके सेवन से ही दुःख से मुक्ति हो जाती है।

    J’ai un remède doué d’un pouvoir merveilleux ; à le prendre, on est délivré de la peine.

  72. পদ 72

    अगर मुक्त होना चाहो तुम, संकट से, बीमारी से। तो है मेरा नम्र निवेदन, हर नर से, हर नारी से।

    অগর মুক্ত হোনা চাহো তুম, সংকট সে, বীমারী সে। তো হৈ মেরা নম্র নিবেদন, হর নর সে, হর নারী সে।

    তোমরা যদি সংকট ও রোগ থেকে মুক্ত হতে চাও, তবে প্রতিটি নর-নারীর কাছে এই আমার বিনীত অনুরোধ:

    If you wish to be rid of trouble and of illness, then this is my humble request to every man and every woman:

    यदि तुम संकट और बीमारी से छुटकारा चाहते हो, तो हर नर और हर नारी से मेरा नम्र निवेदन है:

    Si vous voulez être délivrés du malheur et de la maladie, voici mon humble requête à chaque homme et à chaque femme :

  73. পদ 73

    लो खरीद तुम इसको इसकी, सेवन विधियाँ हैं न्यारी। यद्यपि तुच्छ वस्तु है यह, गुण उसके हैं अतिशय भारी।

    লো খরীদ তুম ইসকো ইসকী, সেবন বিধিয়াঁ হৈং ন্যারী। যদ্যপি তুচ্ছ বস্তু হৈ যহ, গুণ উসকে হৈং অতিশয় ভারী।

    এটি কেনো; এর সেবনবিধি অনন্য; ছোট জিনিস হলেও এর গুণ অতি মহান।

    buy it; its ways of taking are unique; though it is a small thing, its virtues are exceedingly great.

    इसे ले लो, इसके सेवन की विधियाँ अनोखी हैं; यद्यपि यह छोटी-सी वस्तु है, पर इसके गुण अत्यन्त भारी हैं।

    achetez-le ; sa manière de le prendre est singulière ; c’est peu de chose, mais ses vertus sont immenses.

  74. পদ 74

    जो है संततिहीन यहाँ यदि, मेरी औषधि को खाये। पुत्र-रत्न हो प्राप्त, अरे और वह मुँह माँगा फल पाये।

    জো হৈ সংততিহীন যহাঁ যদি, মেরী ঔষধি কো খায়ে। পুত্র-রত্ন হো প্রাপ্ত, অরে ঔর বহ মুঁহ মাঁগা ফল পায়ে।

    এখানে যে নিঃসন্তান, সে আমার ওষুধ খেলে রত্নের মতো পুত্র পাবে আর যে ফল চাইবে তাই পাবে।

    Whoever here is childless, if he eats my medicine, will gain a jewel of a son and receive whatever fruit he asks for.

    जो यहाँ सन्तानहीन है, यदि वह मेरी औषधि खाए, तो उसे पुत्र-रत्न प्राप्त होगा और मुँह माँगा फल मिलेगा।

    Quiconque ici est sans enfant, s’il mange mon remède, obtiendra un joyau de fils et recevra le fruit qu’il demande.

  75. পদ 75

    औषध मेरी जो न खरीदे, जीवन भर पछतायेगा। मुझ जैसा प्राणी शायद ही, अरे यहाँ आ पायेगा।

    ঔষধ মেরী জো ন খরীদে, জীবন ভর পছতায়েগা। মুঝ জৈসা প্রাণী শায়দ হী, অরে যহাঁ আ পায়েগা।

    যে আমার ওষুধ কিনবে না, সে সারাজীবন আফসোস করবে; আমার মতো কেউ এখানে আর কমই আসবে।

    Whoever does not buy my medicine will regret it all his life; one like me will hardly ever come here again.

    जो मेरी औषधि नहीं लेगा, वह जीवन भर पछताएगा; मुझ जैसा प्राणी शायद ही फिर यहाँ आ पाए।

    Qui n’achète pas mon remède le regrettera toute sa vie ; un être comme moi ne reviendra guère ici.

  76. পদ 76

    दुनिया दो दिन का मेला है, मौज शौक तुम भी कर लो। गर इससे मिलता है, सब कुछ, तुम भी इसको ले लो।

    দুনিয়া দো দিন কা মেলা হৈ, মৌজ শৌক তুম ভী কর লো। গর ইসসে মিলতা হৈ, সব কুছ, তুম ভী ইসকো লে লো।

    জগৎ দুদিনের মেলা; তোমরাও আনন্দ করো; এটি যদি তোমাদের সব এনে দেয়, তবে তোমরাও এটি নাও।’

    The world is a fair of two days; you too should enjoy yourselves; if this brings you everything, then you too should take it.’

    दुनिया दो दिन का मेला है, तुम भी मौज-शौक कर लो; अगर इससे सब कुछ मिलता है, तो तुम भी इसे ले लो।

    Le monde est une foire de deux jours ; vous aussi, profitez-en ; si ceci vous donne tout, prenez-le donc. »

  77. পদ 77

    हैरानी बढ़ती जनता की, लख इसकी कारस्तानी। प्रमुदित वह भी मन-ही-मन था, लख लोगों की नादानी।

    হৈরানী বঢ়তী জনতা কী, লখ ইসকী কারস্তানী। প্রমুদিত বহ ভী মন-হী-মন থা, লখ লোগোং কী নাদানী।

    তার কৌশল দেখে মানুষের বিস্ময় বাড়তে লাগল; আর সেও তাদের মূর্খতা দেখে মনে মনে খুশি হল।

    The people’s wonder grew as they watched his tricks; and he too was inwardly delighted, seeing their foolishness.

    उसकी करतूत देखकर जनता की हैरानी बढ़ती गई; और लोगों की नादानी देखकर वह भी मन-ही-मन प्रसन्न था।

    L’ébahissement du peuple croissait devant ses manigances ; et lui se réjouissait en secret, voyant leur naïveté.

  78. পদ 78

    खबर सुनाने बाबा को यह, गया दौड़कर सेवक एक। सुनकर भृकुटी तनी और, विस्मरण हो गया सभी विवेक।

    খবর সুনানে বাবা কো যহ, গয়া দৌড়কর সেবক এক। সুনকর ভৃকুটী তনী ঔর, বিস্মরণ হো গয়া সভী বিবেক।

    এক সেবক ছুটে গিয়ে বাবাকে এই খবর দিল; শুনে তাঁর ভ্রূ কুঁচকে গেল আর সব সংযম ভুলে গেলেন।

    A servant ran to tell Baba this news; hearing it, his brows knit and all restraint was forgotten.

    एक सेवक दौड़कर बाबा को यह समाचार सुनाने गया; सुनते ही उनकी भौंहें तन गईं और सारा संयम जाता रहा।

    Un serviteur courut porter la nouvelle à Baba ; l’entendant, il fronça les sourcils et toute retenue fut oubliée.

  79. পদ 79

    हुक्म दिया सेवक को, सत्वर पकड़ दुष्ट को लाओ। या शिर्डी की सीमा से, कपटी को दूर भगाओ।

    হুক্ম দিয়া সেবক কো, সত্বর পকড় দুষ্ট কো লাও। যা শির্ডী কী সীমা সে, কপটী কো দূর ভগাও।

    তিনি সেবককে আদেশ দিলেন: ‘শীঘ্র দুষ্টটাকে ধরে এখানে আনো, নয়তো প্রতারককে শিরডির সীমানার বাইরে তাড়িয়ে দাও।

    He commanded the servant: ‘Quickly seize the wicked one and bring him here, or drive the cheat out beyond the bounds of Shirdi.

    उन्होंने सेवक को आदेश दिया: शीघ्र उस दुष्ट को पकड़ लाओ, या उस कपटी को शिर्डी की सीमा से दूर भगा दो।

    Il ordonna au serviteur : « Saisis vite le scélérat et amène-le, ou chasse le fourbe au-delà des limites de Shirdi.

  80. পদ 80

    मेरे रहते भोली-भाली, शिर्डी की जनता को। कौन नीच ऐसा जो, साहस करता है छलने को।

    মেরে রহতে ভোলী-ভালী, শির্ডী কী জনতা কো। কৌন নীচ ঐসা জো, সাহস করতা হৈ ছলনে কো।

    আমি এখানে থাকতে, কে এত নীচ যে শিরডির সরল, নিষ্পাপ মানুষদের ঠকাতে সাহস করে?

    While I am here, who is so base as to dare deceive the simple, innocent people of Shirdi?

    मेरे रहते शिर्डी की भोली-भाली जनता को छलने का साहस करने वाला ऐसा नीच कौन है?

    Moi présent, qui est assez vil pour oser tromper les gens simples et naïfs de Shirdi ?

  81. পদ 81

    पलभर में ही ऐसे ढोंगी, कपटी नीच लुटेरे को। महानाश के महागर्त में, पहुँचा दूँ जीवन भर को।

    পলভর মেং হী ঐসে ঢোংগী, কপটী নীচ লুটেরে কো। মহানাশ কে মহাগর্ত মেং, পহুঁচা দূঁ জীবন ভর কো।

    এমন প্রতারক, এমন ঠগ, এমন নীচ লুটেরাকে আমি এক মুহূর্তে তার বাকি জীবনের জন্য সর্বনাশের মহাগর্তে ফেলে দিতাম।’

    In a moment I would cast such a fraud, such a cheat, such a base robber into the great pit of ruin for the rest of his life.’

    ऐसे ढोंगी, कपटी, नीच लुटेरे को मैं पलभर में ही जीवन भर के लिए महाविनाश के गहरे गर्त में पहुँचा दूँ।

    En un instant je jetterais un tel imposteur, un tel fourbe, un si vil brigand dans le gouffre de la ruine pour le reste de sa vie. »

  82. পদ 82

    तनिक मिला आभास मदारी, क्रूर, कुटिल, अन्यायी को। काल नाचता है अब सिर पर, गुस्सा आया साँईं को।

    তনিক মিলা আভাস মদারী, ক্রূর, কুটিল, অন্যায়ী কো। কাল নাচতা হৈ অব সির পর, গুস্সা আয়া সাঁঈং কো।

    নিষ্ঠুর, কুটিল ও অন্যায়কারী বাজিকর এর আভাস পেল: এখন তার মাথার উপর মৃত্যু নাচছে, কারণ সাঁই ক্রুদ্ধ হয়েছেন।

    The juggler, cruel, crooked and unjust, caught a hint of it: death now dances over his head, for Sai has grown angry.

    उस क्रूर, कुटिल, अन्यायी मदारी को थोड़ा आभास हो गया कि अब काल सिर पर नाच रहा है, साईं को क्रोध आ गया है।

    Le bateleur, cruel, retors et injuste, en eut le pressentiment : la mort danse à présent au-dessus de sa tête, car Sai s’est mis en colère.

  83. পদ 83

    पलभर में सब खेल बन्द कर, भागा सिर पर रख कर पैर। सोच रहा था मन ही मन, भगवान नहीं है क्या अब खैर।

    পলভর মেং সব খেল বন্দ কর, ভাগা সির পর রখ কর পৈর। সোচ রহা থা মন হী মন, ভগবান নহীং হৈ ক্যা অব খৈর।

    এক মুহূর্তে সে তার পুরো খেলা বন্ধ করে প্রাণ নিয়ে পালাল; মনে মনে ভাবল, ‘হে ঈশ্বর, আমি কি এখন নিরাপদ নই?’

    In a moment he stopped his whole show and ran for his life; thinking inwardly, ‘O God, am I not safe now?’

    पलभर में सारा खेल बन्द करके वह सिर पर पैर रखकर भागा; मन-ही-मन सोच रहा था: भगवान, क्या अब मेरी खैर नहीं है?

    En un instant il mit fin à tout son spectacle et s’enfuit à toutes jambes ; pensant en lui-même : « Ô Dieu, ne suis-je donc plus sauf ? »

  84. পদ 84

    सच है साईं जैसा दानी, मिल न सकेगा जग में। अंश ईश का साईं बाबा, उन्हें न कुछ भी मुश्किल जग में।

    সচ হৈ সাঈং জৈসা দানী, মিল ন সকেগা জগ মেং। অংশ ঈশ কা সাঈং বাবা, উন্হেং ন কুছ ভী মুশ্কিল জগ মেং।

    সত্যিই, সাঁইয়ের মতো দাতা এই জগতে পাওয়া যাবে না; সাঁই বাবা ঈশ্বরের অংশ, জগতে তাঁর কাছে কিছুই কঠিন নয়।

    Truly, a giver like Sai will not be found in this world; Sai Baba is a portion of God, nothing in the world is hard for him.

    सच है, साईं जैसा दानी संसार में नहीं मिल सकेगा; साईं बाबा ईश्वर के अंश हैं, संसार में उनके लिए कुछ भी कठिन नहीं।

    En vérité, on ne trouvera pas en ce monde un donateur tel que Sai ; Sai Baba est une part de Dieu, rien au monde ne lui est difficile.

  85. পদ 85

    स्नेह, शील, सौजन्य आदि का, आभूषण धारण कर। बढ़ता इस दुनिया में जो भी, मानव-सेवा के पथ पर।

    স্নেহ, শীল, সৌজন্য আদি কা, আভূষণ ধারণ কর। বঢ়তা ইস দুনিয়া মেং জো ভী, মানব-সেবা কে পথ পর।

    যে স্নেহ, গুণ ও শিষ্টতার অলংকারে ভূষিত হয়ে এই জগতে মানবসেবার পথে এগিয়ে যায়,

    Whoever, adorned with the ornaments of affection, virtue and courtesy, goes forward in this world on the path of serving humanity,

    जो कोई स्नेह, शील और सौजन्य आदि के आभूषण धारण करके इस दुनिया में मानव-सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ता है,

    Quiconque, paré des ornements de l’affection, de la vertu et de la courtoisie, avance en ce monde sur le chemin du service de l’humanité,

  86. পদ 86

    वही जीत लेता है जगती के, जन जन का अन्तस्तल। उसकी एक उदासी ही जग को, कर देती है विह्वल।

    বহী জীত লেতা হৈ জগতী কে, জন জন কা অন্তস্তল। উসকী এক উদাসী হী জগ কো, কর দেতী হৈ বিহ্বল।

    সে-ই জগতের প্রতিটি মানুষের অন্তরাত্মা জয় করে; তার একটি দুঃখ সমগ্র জগৎকে বিচলিত করে।

    he alone wins the inmost heart of every person in the world; a single sadness of his moves the whole world.

    वही संसार के जन-जन का हृदय जीत लेता है; उसकी एक उदासी ही सारे जग को व्याकुल कर देती है।

    celui-là seul gagne le cœur de chaque être au monde ; une seule de ses tristesses émeut le monde entier.

  87. পদ 87

    जब-जब जग में भार पाप का, बढ़-बढ़ हो जाता है। उसे मिटाने की ही खातिर, अवतारी हो जाता है।

    জব-জব জগ মেং ভার পাপ কা, বঢ়-বঢ় হো জাতা হৈ। উসে মিটানে কী হী খাতির, অবতারী হো জাতা হৈ।

    যখনই জগতে পাপের ভার ক্রমশ ভারী হয়, তা মুছে দিতে অবতার আবির্ভূত হন।

    Whenever the burden of sin in the world grows ever heavier, the avatar appears to wipe it away.

    जब-जब संसार में पाप का भार बढ़ता जाता है, तब-तब उसे मिटाने के लिए अवतार प्रकट होता है।

    Chaque fois que le fardeau du péché s’alourdit dans le monde, l’avatar paraît pour l’effacer.

  88. পদ 88

    पाप और अन्याय सभी कुछ, इस जगती का हर के। दूर भगा देता दुनिया के दानव को क्षण भर में।

    পাপ ঔর অন্যায় সভী কুছ, ইস জগতী কা হর কে। দূর ভগা দেতা দুনিয়া কে দানব কো ক্ষণ ভর মেং।

    জগতের সব পাপ ও অন্যায় দূর করে, তিনি এক নিমেষে জগতের দানবকে তাড়িয়ে দেন।

    Taking away all the sin and injustice of the world, he drives off the demon of the world in an instant.

    इस संसार के सारे पाप और अन्याय हरकर वह दुनिया के दानव को क्षणभर में दूर भगा देता है।

    Ôtant tout le péché et l’injustice de ce monde, il chasse en un instant le démon du monde.

  89. পদ 89

    स्नेह सुधा की धार बरसने, लगती है दुनिया में। गले परस्पर मिलने लगते, जन-जन हैं आपस में।

    স্নেহ সুধা কী ধার বরসনে, লগতী হৈ দুনিয়া মেং। গলে পরস্পর মিলনে লগতে, জন-জন হৈং আপস মেং।

    তখন জগতে প্রেমের অমৃতধারা বর্ষিত হতে শুরু করে, আর মানুষ পরস্পরকে আলিঙ্গন করতে থাকে।

    Then streams of the nectar of love begin to rain upon the world, and people begin to embrace one another.

    तब दुनिया में स्नेह-सुधा की धारा बरसने लगती है, और जन-जन आपस में गले मिलने लगते हैं।

    Alors des flots du nectar de l’amour se mettent à pleuvoir sur le monde, et les gens s’embrassent les uns les autres.

  90. পদ 90

    ऐसे ही अवतारी साईं, मृत्युलोक में आकर। समता का यह पाठ पढ़ाया, सबको अपना आप मिटाकर।

    ঐসে হী অবতারী সাঈং, মৃত্যুলোক মেং আকর। সমতা কা যহ পাঠ পঢ়ায়া, সবকো অপনা আপ মিটাকর।

    তেমনই, অবতার সাঁই মর্ত্যলোকে এলেন, আর নিজের সত্তা মুছে দিয়ে সকলকে সমতার শিক্ষা দিলেন।

    Even so, Sai the avatar came into the mortal world, and effacing his own self, taught everyone the lesson of equality.

    ऐसे ही अवतारी साईं ने मृत्युलोक में आकर, अपने आप को मिटाकर, सबको समता का पाठ पढ़ाया।

    Ainsi Sai, l’avatar, vint dans le monde des mortels et, s’effaçant lui-même, enseigna à tous la leçon de l’égalité.

  91. পদ 91

    नाम द्वाराका मस्जिद का, रक्खा शिर्डी में साईं ने। पाप, ताप, सन्ताप मिटाया, जो कुछ पाया साईं ने।

    নাম দ্বারাকা মস্জিদ কা, রক্খা শির্ডী মেং সাঈং নে। পাপ, তাপ, সন্তাপ মিটায়া, জো কুছ পায়া সাঈং নে।

    শিরডিতে সাঁই মসজিদের নাম দিলেন দ্বারকা; যার সঙ্গে দেখা হল তার পাপ, পীড়া ও দুঃখ মুছে দিলেন।

    In Shirdi, Sai gave the mosque the name Dvaraka; he wiped away the sin, affliction and suffering of all he met.

    शिर्डी में साईं ने मस्जिद का नाम द्वारका रखा; जो भी उन्हें मिला, उसके पाप, ताप और सन्ताप उन्होंने मिटा दिए।

    À Shirdi, Sai donna à la mosquée le nom de Dvaraka ; il effaça le péché, l’affliction et la souffrance de tous ceux qu’il rencontra.

  92. পদ 92

    सदा याद में मस्त राम की, बैठे रहते थे साईं। पहर आठ ही राम नाम का, भजते रहते थे साईं।

    সদা যাদ মেং মস্ত রাম কী, বৈঠে রহতে থে সাঈং। পহর আঠ হী রাম নাম কা, ভজতে রহতে থে সাঈং।

    সাঁই সর্বদা রামের স্মরণে মগ্ন হয়ে বসে থাকতেন; আট প্রহর জুড়ে তিনি রামনাম জপ করতেন।

    Sai would always sit absorbed in the remembrance of Rama; through all the eight watches he kept chanting the name of Rama.

    साईं सदा राम की याद में मग्न बैठे रहते थे; आठों पहर वे राम-नाम का भजन करते रहते थे।

    Sai restait toujours assis, absorbé dans le souvenir de Rama ; à toute heure du jour et de la nuit il répétait le nom de Rama.

  93. পদ 93

    सूखी-रूखी ताजी बासी, चाहे या होवे पकवान। सदा प्यार के भूखे साई की, खातिर थे सभी समान।

    সূখী-রূখী তাজী বাসী, চাহে যা হোবে পকবান। সদা প্যার কে ভূখে সাঈ কী, খাতির থে সভী সমান।

    শুকনো বা সাদামাটা, টাটকা বা বাসি, বা সুস্বাদু ব্যঞ্জন, শুধু ভালোবাসার ক্ষুধার্ত সাঁইয়ের কাছে সবই সমান ছিল।

    Dry or plain, fresh or stale, or rich delicacies, to Sai, who hungered only for love, all were alike.

    सूखी-रूखी, ताज़ी-बासी या चाहे पकवान हो, सदा प्रेम के भूखे साईं के लिए सब समान थे।

    Sec ou simple, frais ou rassis, ou mets raffinés, pour Sai, qui n’avait faim que d’amour, tout était égal.

  94. পদ 94

    स्नेह और श्रद्धा से अपनी, जन जो कुछ दे जाते थे। बड़े चाव से उस भोजन को, बाबा पावन करते थे।

    স্নেহ ঔর শ্রদ্ধা সে অপনী, জন জো কুছ দে জাতে থে। বড়ে চাব সে উস ভোজন কো, বাবা পাবন করতে থে।

    মানুষ ভালোবাসা ও বিশ্বাসে যা নিবেদন করত, বাবা সেই খাবার অতি তৃপ্তিতে খেয়ে পবিত্র করতেন।

    Whatever people offered him with love and faith, Baba would hallow that food by eating it with great relish.

    लोग अपने स्नेह और श्रद्धा से जो कुछ दे जाते थे, बाबा उस भोजन को बड़े चाव से ग्रहण कर पावन करते थे।

    Tout ce que les gens lui offraient avec amour et foi, Baba sanctifiait cette nourriture en la mangeant avec grand plaisir.

  95. পদ 95

    कभी-कभी मन बहलाने को, बाबा बाग में जाते थे। प्रमुदित मन में निरख प्रकृति, छटा को वे होते थे।

    কভী-কভী মন বহলানে কো, বাবা বাগ মেং জাতে থে। প্রমুদিত মন মেং নিরখ প্রকৃতি, ছটা কো বে হোতে থে।

    কখনো, মনকে সতেজ করতে, বাবা বাগানে যেতেন; প্রকৃতির সৌন্দর্য দেখে তিনি হৃদয়ে আনন্দিত হতেন।

    Sometimes, to refresh his mind, Baba would go into the garden; gazing at the beauty of nature, he would grow joyful at heart.

    कभी-कभी मन बहलाने के लिए बाबा बाग़ में जाते थे; प्रकृति की छटा निहारकर वे मन में प्रसन्न होते थे।

    Parfois, pour se délasser, Baba allait au jardin ; contemplant la beauté de la nature, il se réjouissait en son cœur.

  96. পদ 96

    रंग-बिरंगे पुष्प बाग के, मन्द-मन्द हिल-डुल करके। बीहड़ वीराने मन में भी स्नेह सलिल भर जाते थे।

    রংগ-বিরংগে পুষ্প বাগ কে, মন্দ-মন্দ হিল-ডুল করকে। বীহড় বীরানে মন মেং ভী স্নেহ সলিল ভর জাতে থে।

    বাগানের নানা রঙের ফুল, মৃদু দুলে, উজাড়, শুষ্ক হৃদয়কেও প্রেমের জলে ভরে দিত।

    The many-coloured flowers of the garden, swaying gently, filled even desolate, barren hearts with the waters of love.

    बाग़ के रंग-बिरंगे फूल धीरे-धीरे हिल-डुलकर उजड़े, वीरान मन में भी स्नेह का जल भर देते थे।

    Les fleurs multicolores du jardin, se balançant doucement, emplissaient d’eau d’amour jusqu’aux cœurs désolés et arides.

  97. পদ 97

    ऐसी सुमधुर बेला में भी, दुःख आपद विपदा के मारे। अपने मन की व्यथा सुनाने, जन रहते बाबा को घेरे।

    ঐসী সুমধুর বেলা মেং ভী, দুঃখ আপদ বিপদা কে মারে। অপনে মন কী ব্যথা সুনানে, জন রহতে বাবা কো ঘেরে।

    এমন মধুর ক্ষণেও, দুঃখ, দুর্ভাগ্য ও বিপদে আহত মানুষেরা বাবাকে ঘিরে ধরে তাদের হৃদয়ের ব্যথা বলত।

    Even in such a sweet hour, people struck by sorrow, misfortune and calamity would surround Baba to tell him the pain of their hearts.

    ऐसी मधुर बेला में भी दुःख, आपदा और विपत्ति के मारे लोग अपने मन की व्यथा सुनाने के लिए बाबा को घेरे रहते थे।

    Même en une heure si douce, les gens frappés par la peine, le malheur et la calamité entouraient Baba pour lui confier la douleur de leur cœur.

  98. পদ 98

    सुनकर जिनकी करुण कथा को, नयन कमल भर आते थे। दे विभूति हर व्यथा, शान्ति, उनके उर में भर देते थे।

    সুনকর জিনকী করুণ কথা কো, নয়ন কমল ভর আতে থে। দে বিভূতি হর ব্যথা, শান্তি, উনকে উর মেং ভর দেতে থে।

    তাদের দুঃখের কথা শুনে তাঁর পদ্মনয়ন জলে ভরে যেত; বিভূতি দিয়ে তিনি প্রতিটি ব্যথা দূর করতেন আর তাদের হৃদয় শান্তিতে ভরে দিতেন।

    Hearing their sorrowful tales, his lotus eyes would fill with tears; giving vibhuti, he took away every pain and filled their hearts with peace.

    उनकी करुण कथा सुनकर उनके कमल-नयन भर आते थे; विभूति देकर वे हर व्यथा हर लेते और उनके हृदय में शान्ति भर देते थे।

    Entendant leurs récits douloureux, ses yeux de lotus s’emplissaient de larmes ; donnant la vibhuti, il ôtait toute douleur et emplissait leur cœur de paix.

  99. পদ 99

    जाने क्या अद्भुत, शक्ति, उस विभूति में होती थी। जो धारण करते मस्तक पर, दुःख सारा हर लेती थी।

    জানে ক্যা অদ্ভুত, শক্তি, উস বিভূতি মেং হোতী থী। জো ধারণ করতে মস্তক পর, দুঃখ সারা হর লেতী থী।

    কে জানে সেই বিভূতিতে কী অপূর্ব শক্তি ছিল! যে তা কপালে লাগাত, সে সব দুঃখ থেকে মুক্তি পেত।

    Who knows what wondrous power there was in that vibhuti! Whoever placed it on the forehead was relieved of all sorrow.

    न जाने उस विभूति में कैसी अद्भुत शक्ति होती थी; जो उसे मस्तक पर धारण करता, उसका सारा दुःख हर लेती थी।

    Qui sait quel pouvoir merveilleux résidait dans cette vibhuti ! Quiconque la posait sur son front était délivré de toute peine.

  100. পদ 100

    धन्य मनुज वे साक्षात दर्शन, जो बाबा साईं के पाये। धन्य कमल कर उनके जिनसे, चरण-कमल वे परसाये।

    ধন্য মনুজ বে সাক্ষাত দর্শন, জো বাবা সাঈং কে পায়ে। ধন্য কমল কর উনকে জিনসে, চরণ-কমল বে পরসায়ে।

    ধন্য তারা, যারা সাঁই বাবার প্রত্যক্ষ দর্শন পেয়েছে; ধন্য তাদের করকমল, যা তাঁর চরণকমল স্পর্শ করেছে।

    Blessed are those who had the direct darshana of Sai Baba; blessed are their lotus hands that touched his lotus feet.

    धन्य हैं वे मनुष्य जिन्होंने बाबा साईं के साक्षात् दर्शन पाए; धन्य हैं उनके कर-कमल जिनसे उन्होंने उन चरण-कमलों का स्पर्श किया।

    Bénis ceux qui eurent le darshana de Sai Baba en personne ; bénies leurs mains de lotus qui touchèrent ses pieds de lotus.

  101. পদ 101

    काश निर्भय तुमको भी, साक्षात साईं मिल जाता। बरसों से उजड़ा चमन अपना, फिर से आज खिल जाता।

    কাশ নির্ভয় তুমকো ভী, সাক্ষাত সাঈং মিল জাতা। বরসোং সে উজড়া চমন অপনা, ফির সে আজ খিল জাতা।

    হে নির্ভয়, তুমিও যদি সাঁইয়ের সঙ্গে সামনাসামনি দেখা করতে পারতে, তোমার বছরের পর বছর উজাড় হওয়া বাগান আজ আবার ফুলে ভরে উঠত।

    If only, Nirbhaya, you too could meet Sai face to face, your garden, laid waste for years, would bloom again today.

    काश, निर्भय, तुम्हें भी साक्षात् साईं मिल जाते, तो बरसों से उजड़ा तुम्हारा उपवन आज फिर से खिल उठता।

    Si seulement, Nirbhaya, tu pouvais toi aussi rencontrer Sai face à face, ton jardin dévasté depuis des années refleurirait aujourd’hui.

  102. পদ 102

    गर पकड़ता मैं चरण श्रीके नहीं छोड़ता उम्र भर। मना लेता मैं जरूर उनको, गर रूठते साईं मुझ पर।

    গর পকড়তা মৈং চরণ শ্রীকে নহীং ছোড়তা উম্র ভর। মনা লেতা মৈং জরূর উনকো, গর রূঠতে সাঈং মুঝ পর।

    আমি যদি একবার তাঁর পবিত্র চরণ ধরতে পারতাম, সারাজীবন তা ছাড়তাম না; আর সাঁই কখনো আমার উপর অপ্রসন্ন হলে, আমি নিশ্চয়ই তাঁকে আবার জয় করে নিতাম।

    Had I but held his holy feet, I would not let them go my whole life long; and if Sai were ever displeased with me, I would surely win him back.

    यदि मैं श्री के चरण पकड़ पाता तो उम्र भर नहीं छोड़ता; और यदि साईं मुझसे रूठ जाते, तो मैं उन्हें अवश्य मना लेता।

    Si j’avais pu saisir ses saints pieds, je ne les aurais plus lâchés de toute ma vie ; et si Sai venait à se fâcher contre moi, je saurais sûrement le reconquérir.

শব্দ পরম্পরার; অর্থ ও পথনির্দেশ রাজীব ভার্গব, Ph.D.-এর।

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